शनिवार, 31 दिसंबर 2016

देवमणि दुबे को स्वानन्द सारस्वत सम्मान

देवमणि दुबे को स्वानन्द सारस्वत सम्मान
स्वानन्द आश्रम में अमृत रश्मियों के बीच काव्य निशा सम्पन्न


थाणे: भारतवर्ष की शान कहे जाने वाले उपनिषदों की रचना भी अरण्य में हुई और आज शरद पूर्णिमा पर काव्य गंगा से येऊर वन का स्वानन्द परिसर भी अमृतमय हो गया है। आज के सम्मानमूर्ति और अन्य कवियों की रचनाओं से पता चलता है कि यह धरती बहुत पूण्य वाली है। यह उदगार प्रोफेसर नन्दलाल पाठक, कार्यकारी अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के थे जो उन्होंने प.पू.स्वानंद बाबा आश्रम, येऊर हिल्स, ठाणे-पश्चिम में काव्य निशा तथा सम्मान समारोह में समारोह अध्यक्ष के रूप में व्यक्त किए। मंच पर विराजमान मुख्य अतिथि रविंद्र भुसारी, संगठन महामंत्री, महाराष्ट्र भाजपा, विलेपार्ले के विधायक पराग अलवनी, मुम्बई मित्र, वृत्त मित्र के समूह सम्पादक अभिजीत राणे का स्वागत न्यास के मुख्य न्यासी प्रेम शुक्ल व पंडित दुर्गा प्रसाद पाठक तथा कार्यक्रम संयोजक बबलू पांडेय ने किया। इस अवसर पर जाने माने कवि  देवमणि दुबे को तृतीय स्वानन्द सारस्वत सम्मान 2016 स्वरूप शॉल, श्रीफल, ट्राफी, पुष्पगुच्छ और 11001 रुपए की नकद राशि से सम्मानित किया गया। प्रेम शुक्ल ने देवमणि दुबे के बारे में बताया कि
बहुत लोग मानते हैं कि भारत की पॉलिटिक्स यूपी के बिना जीरो बटा सन्नाटा है। और बीजेपी ने यूपी वाली पॉलिटिक्स में अपनी जड़ गहराने के लिए देवमणि दुबे को तैयार किया है। 27 अगस्त को देवमणि अपनी रेलवे की नौकरी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली है वे सुल्तानपुर के लम्भुआ से भाजपा के टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़ेंगे। देवमणि ने ही अपने कार्यकाल में एक बार रेलमंत्री के सास-ससुर को ट्रेन से उतारा था।
2006 में रेलमंत्री थे लालू प्रसाद यादव। उसी दौरान देवमणि विजिलेंस डायरेक्टर थे। लालू के रिश्तेदारों से भिड़ंत हुई छपरा रेलवे स्टेशन पर। लालू के सास-ससुर और कुछ रिश्तेदार फर्स्ट एसी डिब्बे में जा रहे थे। गाड़ी थी बिहार संपर्क क्रांति. देवमणि ने पता किया तो इन लोगों के पास टिकट नहीं था। तो छपरा स्टेशन पर उतारकर जुर्माना ठोंक दिया।
देवमणि की हिस्ट्री बड़ी रिच है। कवि, वक्ता और इंग्लिश लिट्रेचर से ग्रेजुएट, साइंस से पोस्ट ग्रेजुएट देवमणि ने सन 1988 में यूपी पुलिस जॉइन की थी। पुलिस अधीक्षक बने। वे1992 में रेलवे अफसर बने। सन 2003 में रेलवे के विजिलेंस डायरेक्टर बन गए। कवि साहित्यकार के बाद अब वे राजनेता की भूमिका में हैं।
'राजनीति गम्भीर विषय है, आवारों पर छोड़ न देना' सम्मानमूर्ति देवमणि दुबे  की इस लम्बी जीवंत कविता के जादू से समस्त श्रोतागण मोहित हो गए। उन्होंने अपनी ख़ास शैली में कुछ और रचनाएँ सुनाकर सभी का दिल जीत लिया।
शांति प्रेम शुक्ल ने सुश्री प्रीति गांधी का सम्मान किया। मुख्य अतिथि रविंद्र भुसारी ने कहा कि इस सुरम्य माहौल में मैं पहली बार आया हूँ। पर चमत्कृत हो गया हूँ। प्रेम शुक्ल को इस जंगल में धर्म और साहित्य का मंगल करने के लिये साधुवाद।
काव्यनिशा में लोकनाथ तिवारी अनगढ़, कमलेश पांडेय तरुण, रासबिहारी पांडेय, सुश्री ज्योति त्रिपाठी, शिवजी पांडेय शिवम तथा उमेश पांडेय ने राजेश विक्रांत के संचालन में हिस्सा लिया।
इस अवसर पर सुश्री प्रीति गांधी,  एन सी पी नेता उदय प्रताप सिंह, डॉ हरीश सिंह, शेष नारायण त्रिपाठी, शिक्षा विद नूतन पांडेय, सी ए पंकज जायसवाल, आलोक पांडेय, जाकिर अहमद, आलोक पांडेय, प्रेमचंद शर्मा, पुष्पराज मिश्र, नागेंद्र शुक्ला, गिरीश यादव, धर्मेंद्र पांडेय, सुनील मिश्र, गणेश पांडेय, सुप्रसिध्द  फिल्म निर्माता सुरजीत सिंह, दिवाकर सिंह, सिम्पम सिंह, प्रियंका दुबे, मयंक रावत, मनोहर पंडित, गुड्डू पाठक, संजय सिंह ठाकुर, अरुण शुक्ल, जीतेन्द्र मल्लाह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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