शनिवार, 31 दिसंबर 2016

राजेश विक्रांत की पुस्तक एक श्रेष्‍ठ व्यंग्य कृति

सरल, सहज व बिना लॉग लपेट के व्यक्त व्यंग्य विचार

बतरस (व्यंग्य संकलन)

लेखक    - राजेश विक्रांत

समीक्षक - डा. राजेश्वर उनियाल


    हालांकि व्यंग्य लेख तो हमें यदाकदा पढने को मिल ही जाते हैं, परंतु व्यंग्य संकलन या व्यंग्य विधा की पुस्तकें बहुत कम उपलब्ध हो पाती हैं । इसी क्रम में जब मुझे श्री राजेश विक्रांत जी का व्यंग्य संकलन बतरस पढने को मिला तो मैंने समय निकालकर उसे पढा और पढता चला गया । सरल, सहज व बिना लाग-लपेट के व्यक्त व्यंग्य विचारों को अगर पढ़ना हो तो मैं कहूंगा कि श्री राजेश विक्रांत जी की पुस्तक एक श्रेष्‍ठ व्यंग्य कृति है । इस हेतु उन्हें साधुवाद ।

    व्यंग्य एक ऐसी विधा है जिसमें लेखक प्रतीकात्मक ढंग से महत्वपूर्ण बातें कह जाता है । व्यंग्य गंभीर होने के साथ-साथ चोटिल होता है और चोटिल होने के लिए व्यंग्य को धारदार होना चाहिए । लेकिन स्वभाव से सीधे व सरल श्री विक्रांत प्रतीकात्मक के बजाए वर्णनात्मक पर अधिक ध्यान देते हैं तथा उनको जो कहना होता है वह सीधे-सीधे कह देते हैं ।

    दूसरी बात यह है कि प्रत्येक व्यंग्यकार की अपनी एक विशिष्ट शैली होती है । वह अपनी शैली विकसित करता है और उसी शैली में व्यंग्य रचता है । इससे एक तो साहित्य भी समृद्ध होता है और साथ ही रचनाकार की भी एक छाप बनती है । आशा है कि श्री राजेश विक्रांत जी भी अपनी भावी रचनाओं में अपनी व्यंगात्मक शैली को विकसित करेंगे ।

    व्यंग्य की एक और विशेषता होती है कि इसके लेखन में कहीं भी लगना नहीं चाहिए कि आप व्यंग्य लिख रहे हैं । आपकी विषय वस्तु व कथन अपने आप में व्यंग्य को उपजाऊ बना देगी । कई बार तो पूरी रचना को पढ़ने के बाद ही अहसास होता है कि आपने व्यंगात्मक बात की है । व्यंग्य का सीधा सा तात्पर्य है कि यह पाठक को कुछ नहीं, बहुत कुछ सोचने पर विवश कर दे ।

इसी के साथ श्री राजेश विक्रांत जी व्यवसाय से पत्रकार हैं और उन्होंने अधिकतर रचनाएं अपने समाचार पत्र हेतु लिखे हैं । समाचार पत्र हेतु लेखन और पुस्तक लेखन में बहुत बड़ा अंतर होता है । समाचार पत्र हेतु लिखते समय आपको संपादक की रुचि व मर्यादाओं का ध्यान रखना पडता है अर्थात आपकी एक सीमा रेखा होती है । जबकि पुस्तक लेखन में आपका स्वामी वह पाठक होता है जो आपकी पुस्तक खरीद कर पढ़ता है । इसलिए पुस्तक लेखन के समय पाठकवर्ग को ध्यान रखते हुए लिखना चाहिए । हम यह भी कह सकते हैं कि एक पत्रकार जब अपनी व्यंग्य रचनाएं पत्रिका की अपेक्षा पुस्तक हेतु रचता है तो उसे लिखने की ज्यादा स्वतंत्रता होती है ।
    भारत पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित की इस पुस्तक में 50 व्यंग्य रचनाएं हैं । यदि थोडा सा ध्यान पुस्तक के प्रकाशन की गुणवत्ता की ओर दिया जाता तो निसंदेह यह सोने में सुहागा कहलाता ।
    श्री राजेश विक्रांत जी के अब तक लगभग 12,000 लेख प्रकाशित हो चुके हैं । आप युवा हैं व मां सरस्वती का वरदहस्त आपके ऊपर है । हमें आशा है कि भविष्य में आपकी और भी उत्कृष्ट कृतियां पाठकों के हाथों में होगी ।

देवमणि दुबे को स्वानन्द सारस्वत सम्मान

देवमणि दुबे को स्वानन्द सारस्वत सम्मान
स्वानन्द आश्रम में अमृत रश्मियों के बीच काव्य निशा सम्पन्न


थाणे: भारतवर्ष की शान कहे जाने वाले उपनिषदों की रचना भी अरण्य में हुई और आज शरद पूर्णिमा पर काव्य गंगा से येऊर वन का स्वानन्द परिसर भी अमृतमय हो गया है। आज के सम्मानमूर्ति और अन्य कवियों की रचनाओं से पता चलता है कि यह धरती बहुत पूण्य वाली है। यह उदगार प्रोफेसर नन्दलाल पाठक, कार्यकारी अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के थे जो उन्होंने प.पू.स्वानंद बाबा आश्रम, येऊर हिल्स, ठाणे-पश्चिम में काव्य निशा तथा सम्मान समारोह में समारोह अध्यक्ष के रूप में व्यक्त किए। मंच पर विराजमान मुख्य अतिथि रविंद्र भुसारी, संगठन महामंत्री, महाराष्ट्र भाजपा, विलेपार्ले के विधायक पराग अलवनी, मुम्बई मित्र, वृत्त मित्र के समूह सम्पादक अभिजीत राणे का स्वागत न्यास के मुख्य न्यासी प्रेम शुक्ल व पंडित दुर्गा प्रसाद पाठक तथा कार्यक्रम संयोजक बबलू पांडेय ने किया। इस अवसर पर जाने माने कवि  देवमणि दुबे को तृतीय स्वानन्द सारस्वत सम्मान 2016 स्वरूप शॉल, श्रीफल, ट्राफी, पुष्पगुच्छ और 11001 रुपए की नकद राशि से सम्मानित किया गया। प्रेम शुक्ल ने देवमणि दुबे के बारे में बताया कि
बहुत लोग मानते हैं कि भारत की पॉलिटिक्स यूपी के बिना जीरो बटा सन्नाटा है। और बीजेपी ने यूपी वाली पॉलिटिक्स में अपनी जड़ गहराने के लिए देवमणि दुबे को तैयार किया है। 27 अगस्त को देवमणि अपनी रेलवे की नौकरी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली है वे सुल्तानपुर के लम्भुआ से भाजपा के टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़ेंगे। देवमणि ने ही अपने कार्यकाल में एक बार रेलमंत्री के सास-ससुर को ट्रेन से उतारा था।
2006 में रेलमंत्री थे लालू प्रसाद यादव। उसी दौरान देवमणि विजिलेंस डायरेक्टर थे। लालू के रिश्तेदारों से भिड़ंत हुई छपरा रेलवे स्टेशन पर। लालू के सास-ससुर और कुछ रिश्तेदार फर्स्ट एसी डिब्बे में जा रहे थे। गाड़ी थी बिहार संपर्क क्रांति. देवमणि ने पता किया तो इन लोगों के पास टिकट नहीं था। तो छपरा स्टेशन पर उतारकर जुर्माना ठोंक दिया।
देवमणि की हिस्ट्री बड़ी रिच है। कवि, वक्ता और इंग्लिश लिट्रेचर से ग्रेजुएट, साइंस से पोस्ट ग्रेजुएट देवमणि ने सन 1988 में यूपी पुलिस जॉइन की थी। पुलिस अधीक्षक बने। वे1992 में रेलवे अफसर बने। सन 2003 में रेलवे के विजिलेंस डायरेक्टर बन गए। कवि साहित्यकार के बाद अब वे राजनेता की भूमिका में हैं।
'राजनीति गम्भीर विषय है, आवारों पर छोड़ न देना' सम्मानमूर्ति देवमणि दुबे  की इस लम्बी जीवंत कविता के जादू से समस्त श्रोतागण मोहित हो गए। उन्होंने अपनी ख़ास शैली में कुछ और रचनाएँ सुनाकर सभी का दिल जीत लिया।
शांति प्रेम शुक्ल ने सुश्री प्रीति गांधी का सम्मान किया। मुख्य अतिथि रविंद्र भुसारी ने कहा कि इस सुरम्य माहौल में मैं पहली बार आया हूँ। पर चमत्कृत हो गया हूँ। प्रेम शुक्ल को इस जंगल में धर्म और साहित्य का मंगल करने के लिये साधुवाद।
काव्यनिशा में लोकनाथ तिवारी अनगढ़, कमलेश पांडेय तरुण, रासबिहारी पांडेय, सुश्री ज्योति त्रिपाठी, शिवजी पांडेय शिवम तथा उमेश पांडेय ने राजेश विक्रांत के संचालन में हिस्सा लिया।
इस अवसर पर सुश्री प्रीति गांधी,  एन सी पी नेता उदय प्रताप सिंह, डॉ हरीश सिंह, शेष नारायण त्रिपाठी, शिक्षा विद नूतन पांडेय, सी ए पंकज जायसवाल, आलोक पांडेय, जाकिर अहमद, आलोक पांडेय, प्रेमचंद शर्मा, पुष्पराज मिश्र, नागेंद्र शुक्ला, गिरीश यादव, धर्मेंद्र पांडेय, सुनील मिश्र, गणेश पांडेय, सुप्रसिध्द  फिल्म निर्माता सुरजीत सिंह, दिवाकर सिंह, सिम्पम सिंह, प्रियंका दुबे, मयंक रावत, मनोहर पंडित, गुड्डू पाठक, संजय सिंह ठाकुर, अरुण शुक्ल, जीतेन्द्र मल्लाह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016

व्यक्ति एक, व्यक्तित्व अनेक: राजेश विक्रांत' का विमोचन

विकलांग की पुकार के वार्षिकोत्सव में हुआ 'व्यक्ति एक, व्यक्तित्व अनेक: राजेश विक्रांत' का विमोचन

सुरेश डी मिश्र, डॉ पवन त्रिपाठी,  प्रीतम कुमार सिंह त्यागी व राजेश एम मिश्र हुए सम्मानित

प्रेम शुक्ल फाउंडेशन उद्घाटन सम्पन्न



मुम्बई: आज का यह कार्यक्रम कर्मयोगी पत्रकार राजेश विक्रांत को समर्पित है। निरन्तर सत्कर्म और सृजन ही उनकी विशेषता है। यह
प्रोफेसर नन्दलाल पाठक, कार्यकारी अध्यक्ष महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ने मंगलवार की शाम
 राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक 'विकलांग की पुकार ' के 12 वें वार्षिकोत्सव में ब्रह्म महेश्वर भवन, सन्यास आश्रम, विलेपार्ले पश्चिम में व्यक्त किये।

वरिष्ठ पत्रकार, भाजपा नेता तथा विकलांग के पुकार के संरक्षक प्रेम शुक्ल ने कहा कि राजेश विक्रांत हर विषय के जानकार हैं। समन्वय कला में माहिर हैं तथा इनकी व्यंग्य रचनाएँ भी हरिशंकर परसाई और के पी सक्सेना से किसी तरह कम नही हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों
अंतरराष्ट्रीय शायर डॉ त्रिपाठी, डॉ राधेश्याम तिवारी (एसोसिएट प्रोफेसर, इतिहास, आर आर पी जी कॉलेज, अमेठी) तथा श्री अवधेश नारायण पांडेय, ग्रुप प्रेजिडेंट, टापवर्थ ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुई। कवि रवि यादव की सरस्वती वंदना के बाद अमन कबीरी ने प्रार्थना प्रस्तुत की।
इस अवसर पर दोपहर का सामना के मुख्य उपसम्पादक अभय मिश्र द्वारा संपादित पुस्तक व्यक्ति एक, व्यक्तित्व अनेक: राजेश विक्रांत का विमोचन हुआ। तथा टॉप म्यूजिक कंपनी की प्रस्तुति सुरजीत सिंह द्वारा निर्मित किए जाने वाले राहुल पंडित निर्देशित वृत्त चित्र "सौम्य, सरल और शांत राजेश विक्रांत" का शुभारंभ भी किया गया। अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम के प्रमुख आयोजक सरताज मेहदी, सलाहकार सम्पादक डॉ जे पी बघेल, पत्रकारिता कोश के सम्पादक आफताब आलम व नमस्ते बॉलीवुड के सम्पादक धर्मेंद्र पांडेय ने किया। अखबार के संरक्षक प्रेम शुक्ल के जन्म माह में आयोजित इस कार्यक्रम में एक सेवाभावी संस्था प्रेम शुक्ल फाउंडेशन- पी एस एफ का उद्घाटन भी अतिथियों द्वारा किया गया और  दैनिक विश्वमित्र व ब्लिट्ज के वरिष्ठ पत्रकार तथा कवि प्रीतम कुमार सिंह त्यागी को पत्रकारिता के लिये और पत्रकार लेखक राजेश एम मिश्र को पी एस एफ सहयोगी सम्मान प्रदान किया गया।
डॉ राधेश्याम तिवारी ने कहा कि राजेश विक्रांत से मुझे परिचित हुए बहुत ज्यादा समय नही हुआ। पर इनकी सरलता और शांत स्वभाव तथा बतरस की लेखन कला ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। अवधेश नारायण पांडेय ने कहा कि राजेश विक्रांत ने अपने परिश्रम के बल पर अमेठी से आकर मुंबई में एक बड़ा मुकाम बनाया है। सागर त्रिपाठी तथा गीतकार रास बिहारी पांडेय ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम में एस्ट्रोलॉजी टुडे के सम्पादक डॉ पवन त्रिपाठी को पत्रकारिता गौरव  तथा श्री महाराष्ट्र रामलीला मण्डल के महासचिव सुरेश डी मिश्र को विकलांग की पुकार संस्कृति गौरव से सम्मानित किया गया। मंच संचालक अश्विनी कुमार जोशी, साहित्यप्रेमी बी एल रंगा, मिलन फाउंडेशन के अध्यक्ष खान, शिक्षाविद नूतन पांडेय ने इस मौके पर राजेश विक्रांत का सम्मान किया।कार्यक्रम की आयोजन समिति में संपादक एड सैयद आफताब मेहदी, समाजसेवी सैयद शुजात हुसैन, तेजस्वी दुनिया के सह संपादक प्रोफेसर सन्तोष तिवारी, पत्रकार प्रेम चौबे, कवि अनिल त्रिपाठी कड़क व नूर हसन का समावेश रहा। इस अवसर पर आशीर्वाद के निदेशक डॉ उमाकांत बाजपेयी, हम लोग के अध्यक्ष एड विजय सिंह,श्रुति संवाद के अध्यक्ष अरविन्द राही, लेखक विद्याभूषण तिवारी, डा वनमाली चतुर्वेदी, वासन्ती वैद्य, आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली, पत्रकार सैयद सलमान, रविंद्र मिश्र, जाफर शेख, फैजुल शेख, गिरिधर बलोदी, सन्तोष शुक्ल, कैलाश गुप्ता, संजय पांडे,समाजसेवी कमाल अहमद, राकेश कुमार तिवारी, डॉ वीरेंद्र मिश्र, अमेठी चैरिटेबल ट्रस्ट के राज मिश्र और के डी शुक्ल, खबरें पूर्वांचल के सम्पादक रविंद्र दुबे, चार भुजा टाइम्स के रिपोर्टर जितेंद शर्मा, पत्रकार संजय अमान, कवयित्री लक्ष्मी यादव, समाजसेवी देवेश तिवारी, सी ए प्रवीण जैन, आदिज्ञान सम्पादक जीत सिंह चौहान, कथाकार राजीव रोहित, प्रीति पांडेय, अनुपम मिश्र, बबलू मिश्र, विभा दुबे, त्रिभुवन दुबे, डिजाइनर जितेंद पांडेय, गीतकार रुस्तम घायल, कवि जवाहर लाल निर्झर, विनय शर्मा दीप, प्रेम जौनपुरी, शिक्षक रवि उपाध्याय आदि प्रमुख हस्तियां कार्यक्रम में मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन व्यंग्यकार, कवि डॉ अनन्त श्रीमाली  ने किया।