शनिवार, 2 जुलाई 2016

राजेश विक्रांत के सद्य प्रकाशित व्यंग्य संग्रह "बतरस" पर चर्चा गोष्ठी एवं व्यंग्य रचना पाठ सम्पन्न

बतरस सरीखे रसदार व्यंग्य पाठ की बौछार
"राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" तथा "स्वतन्त्र जन समाचार" की ओर से एक शाम व्यंग्य के नाम

मुम्बई: राजेश विक्रांत अच्छे व्यंग्यकार हैं। इसी वजह से हमने 2007 में इनका स्तम्भ बतरस शुरू किया था। यह ख़ुशी की बात है कि इसी नाम से इनकी पुस्तक भी आ गई है। मैंने पुस्तक पढ़ी है। इनमे दूसरा रवीन्द्रनाथ त्यागी बनने की सम्भावनाएँ मौजूद हैं। यह उदगार वरिष्ठ पत्रकार और भाजपा नेता प्रेम शुक्ल ने रविवार 26 जून  की शाम सांताक्रुज पूर्व के मौलाना आजाद हाल में आयोजित एक शाम व्यंग्य के नाम के प्रमुख अतिथि के रूप में व्यक्त किये। राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा तथा स्वतन्त्र जन समाचार ने राजेश विक्रांत के सद्य प्रकाशित व्यंग्य संग्रह बतरस पर चर्चा तथा व्यंग्य पाठ का आयोजन किया था। कार्यक्रम के अध्यक्ष कवि साहित्यकार माणिक मुंडे ने व्यंग्य को साहित्य की एक कठिन विधा बताया। इसलिये आजकल व्यंग्य पर बहुत कम लिखने वाले मिलते हैं। फिर भी विक्रांत की बतरस उम्मीदों पर खरी उतरने वाली पुस्तक साबित हुई है। जबकि सम्मानीय अतिथि लोकप्रिय कहानी पोर्टल व प्रकाशन संस्थान स्टोरीमिररडॉटकॉम के प्रमुख विभु दत्ता राउत ने हास्य व्यंग्य को जीवन का अंग कहते हुए राजेश विक्रांत के इस प्रथम व्यंग्य संग्रह पर काम करने की इच्छा दर्शाई। बतरस पर चर्चा की शुरआत करते हुए साहित्यकार व्यंग्यकार कैलाश सेंगर ने कहा कि शरद जोशी का कार्यक्षेत्र मुम्बई रहा है लिहाजा यहां व्यंग्य की बढ़िया फसल होती है। डॉ सूर्यबाला से लेकर राजेश विक्रांत तक। सभी का अपना एक अलग महत्व है। डॉ अनन्त श्रीमाली ने कहा कि हिंदी सामना में  राजेश जी का इसी नाम से एक कालम 2007 से ही छप रहा है। अखबारी कालम की मजबूरियों के बावजूद बतरस व्यंग्य, विसंगति व विद्रूपता का त्रिवेणी संगम है।  डॉ राजेश्वर उनियाल ने कहा कि पुस्तक में वर्णानात्मक शैली ज्यादा है जबकि इसे प्रतीकात्मक होना चाहिये। लेखक को अभी धार देने की जरूरत है तथा बतरस्कार को अपनी एक ख़ास शैली विकसित करनी होगी। पत्रकार अवनींद्र आशुतोष की राय में बतरस रसदार है। जबकि पत्रकारिता कोश के सम्पादक आफताब आलम ने सारगर्भित आलेख पढ़ते हुए पुस्तक को सार्थक बताया। मशहूर हास्य कवि महेश दुबे का व्यंग्यात्मक शैली में लिखा गया आलेख हास्य रस का ट्रिपल डोज बतरस राजेश विक्रांत ने प्रस्तुत किया।
व्यंग्य पाठ में डॉ अनन्त श्रीमाली ने श्री 'साडी खरीदाय नमः', कैलाश सेंगर ने 'शवयात्रा का यूनीफार्म', डॉ राजेश्वर उनियाल ने 'व्यंग्य संचालक',  सुश्री अलका अग्रवाल सिगतिया ने 'हिंदी माता का श्राद्ध', अमर त्रिपाठी ने 'कौवो की श्रद्धांजलि सभा', शीतला पाण्डेय ने 'तालियां' व राजेश विक्रांत ने 'अपने बारे में' का पाठ किया।
इस कार्यक्रम में स्वतन्त्र जन समाचार के सम्पादक डी के जोशी, आशीर्वाद के डायरेक्टर डॉ उमाकांत बाजपेयी, संगीतविद् पं वी नरहरि, तहलका महाराष्ट्र के सम्पादक आचार्य पवन त्रिपाठी, उद्घोषिका नीता बाजपेयी, कवयित्री ज्योति त्रिपाठी, कवि रवि यादव, अनिल त्रिपाठी कड़क, अखिलेश अनभिज्ञ, लोकनाथ तिवारी अनगढ़, कथाकार संगीता बाजपेयी, वरिष्ठ पत्रकार सैयद सलमान, ब्रजेश चन्द्रा, राहुल दुबे, पत्रकार गायक संजीव पाण्डेय, विकलांग की पुकार के कार्यकारी सम्पादक सरताज मेहदी, फोटोग्राफर अर्जुन काम्बले, इंडियन एक्सप्रेस न्यूज चैनल के एम डी सुरजीत सिंह, एड आरके मिश्र, साहित्यप्रेमी के के त्रिपाठी,रुचि शर्मा, शिखा आचार्य, अनुरत्न राय, कवयित्री रेखा रोशनी, नागेंद्र  कुमार, अरुण सिन्हा, शर्मिला मिश्र, अनुपम मिश्र, आशा त्रिपाठी, विद्याकान्त मिश्र, रमेश यादव, उपेन्द्र शुक्ल, मुकेश मिश्र, त्रिभुवन दुबे, उपेन्द्र शुक्ल, बबलू मिश्र, विभा दुबे, ओमप्रकाश मिश्र, मोहिन्दर सिंह नागी, दशरथ परब, नूर हसन आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम का सञ्चालन  प्रेम कुमार, आरजे ने किया जबकि आभार प्रदर्शन शत्रुघ्न प्रसाद अध्यक्ष, राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा, भारत ने किया।
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