किसी और बम से ज्यादा घातक है क्लाइमेट बम
आखिर में एक जागरूक नागरिक की हैसियत से यह सवाल उठता है कि हम आखिर गलोबल वार्मिंग से निपटने के लिए कैसे योगदान दे सकते हैं। कुछ सरल नुस्खे हैं जिनका पालन करके। अपने बल्ब बदल डालें। इनकैंडीसेंट बल्ब की जगह कांपैक्ट फ्लूरीसेंट लैंप-सीएफएल लगाएं। नहाने के पानी को गर्म करने के लिए सौर हीटर लगाएं। पर्यावरण के अनुकूल घर बनाएं। वृक्षारोपड़़ को बढावा दें। इस बारे में मुंबई से प्रकाशित पत्रिका हरित जीवन के संपादक नामदार राही कहते हैं, हमें पर्यावरण की रक्षा करना चाहिए। यह हमारी सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। इमरजेंंसी के दौरान संजय गांधी का दिया नारा याद है क्या। हर कोई एक पौधा लगाए। क्योंंकि पेड़़ कार्बन डाई आक्साइड सोखने के मामले में अव्वल हैं। अगर हर व्यक्ति एक पेड लगा दे तो दुनिया में ६ अरब पेड़ बड़े होने लगेंगे, इससे हजारों टन कार्बन डाई आक्साइड पर्यावरण से सोखा जा सकता है।
पवन ऊर्जा के प्रयोग को बढावा दीजिए। प्लस्टिक के थैले प्रयोग में न लाएं। जितना भी ज्यादा से ज्यादा हो सके पानी की बचत कीजिए। नहाने के तत्काल बाद ही गीजर बंद कर दीजिए। जब काम हो जाए, कंप्यूटर/लैपटॉप आदि बंद कर दें। कागज की बचत करने का प्रयास करें। इससे हजारों पेड़़ कटने से बच जाएंगे। जैसा कि मेरे एक मित्र पर्यावरण प्रेमी नितिन गजरे करते भी हैं। नितिन गजरे हमेशा यह कोशिश करते हैं कि वे जेराक्स लेने या कुछ नोटिंग आदि करने के लिए हर संभव रिसाइकिल पेपर का इस्तेमाल ही करते हैं। हमें उनसे अपने पुराने सामान को बेहतर ढंग से बार-बार इस्तेमाल करनेे की खूबियां सीखनी चाहिए। अगर आप अपने दोस्त को कुछ संदेश देना चाहते हैं तो इसे फोन या ईमेल के जरिए भेजें। अगर बहुत जरूरी हुआ तभी ईमेल को प्रिंट करें। सोने से पहले या जब अॅाफिस से जा रहे हों लाइट बंद कर दें। कार व बाइक के टायरों में पर्याप्त हवा भरी हो तो गाड़ी कम ईंधन खाती है।
हम आपको हिमालय का योगी या परम तपस्वी बनने के लिए नहीं कह रहे हैं, पर एक जागरूक भारतीय व पर्यावरण प्रेमी नागरिक बनने की अपील तो कर ही सकते हैं। बायो-फ्यूल अपनाएं। स्वच्छ प्रोद्योगिकी मांग कीजिए। अगली बार जब आपको प्रेस, ओवेन, टीवी, फ्रिज या कोई एअरकंडीशनर खरीदना हो तो उन मॉडलों का चयन करें जिनकी खासियत कम बिजली खपत करना है। जब बाइक या कार खरीदना हो तो कम ईंधन खपत वाले वाहन खरीदें। अगर आपको सिर्फ माचिस ही खरीदनी है तो मोहल्ले की दुकान तक पैदल जाएं, गाड़ी से नहीं। अगर आपक ो गाडी से ही जाना है तो एक साथ कई काम निपटा लीजिए। अगर आपका काम फोन, वीडियो कांफ्रेंसिंग या ईमेल से चल जाता है तो हवाई यात्रा कम करें। इससे जहां एक ओर आपका पैसा बचेगा वहीं दुनिया कार्बन के उत्सर्जन से बचेगी। और सबसे बडी बात तो कथाकार राजीव रोहित कहते हैं। उनका कहना है कि आप अपने प्रयासों की चर्चा भी करें। दूसरों को बताएं कि भले ही आप प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित कर रहे हैं, पर आपका पडोसी अगर ऐसा नहीं कर रहा है तो आपको खास फायदा नहीं हो रहा है लिहाजा दूसरों को भी शिक्षित कीजिए।
बरोबर बोले विक्रांत भाई /
जवाब देंहटाएंपहली बार आया ब्लॉग पर …. कई कई महीनों बाद पढने को मिला 'विक्रांत' , बढ़िया तो लिखते ही हो यार तुम …