रविवार, 20 फ़रवरी 2011

देश की साहित्यिक, सांस्कृतिक चेतना की प्रतीक है अवधी


अवधी प्रचार आंदोलन का प्रमुख मुकाम बना

येऊर (ठाणे) महाराष्ट्र के स्वानंद आश्रम में अवधी विद्वानों का जमावड़ा


परिचर्चा में नवनीत के पूर्व संपादक डॉ. गिरिजा शंकर त्रिवेदी, साहित्यकार, डॉ. आशारानी लाल, अभियान के अध्यक्ष अमरजीत मिश्र व दोपहर के संपादक निजामुद्दीन राइन व सिटी चैनल (जानपुर) के प्रमुख संवाददाता सौरभ ओमर ने भी शिरकत की। सम्मेलन में यूपी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी ने भी सहभागिता की।

राजेश विक्रांत

ठाणे के येऊर हिल्स स्थित स्वानंद बाबा आश्रम में प्रेम शुक्ल के नेतृत्व में आयोजित अखिल भारतीय अवधी सम्मेलन में देश के कोने-कोने से आए अवधी विद्वानों की गंभीर चर्चा, सृजन संवाद व कवियों की लोककाव्य फुहारों ने गत रविवार को पूरे दिन तकरीबन 2 हजार भाषाप्रेमियों को अवधीमय कर दिया। इस आयोजन को अंतरर्राष्ट्रीय छठा देने के लिए चाड गणतंत्र के हिंदी व भारतप्रेमी अदुम इदरीस अदुम व अदम महमत येस्केइमी तथा नेपाल में अवधी को प्रचारित करनेवाले लोकनाथ वर्मा राहुल विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसमें यूपी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी ने भी सहभागिता की।

अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन व अशोक टाटम्बरी (फैजाजाबाद) की सरस्वती वंदना से प्रारंभ सम्मेलन में प.पू. स्वानंद बाबा सेवा न्यास के मुख्य न्यासी प्रेम शुक्ल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए अवधी के संरक्षण, संवर्द्धन हेतु भरसक प्रयास करने का वचन दिया। अवधी की चुनौतियां पर परिचर्चा के अध्यक्ष के रूप में पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामजी तिवारी ने कहा कि अवधी भाषा की ताकत पहले ही साबित हो चुकी है। गोस्वामी तुलसीदास ने अवधी को समृद्ध भाषा का दर्जा दिया था। रामचरित मानस अवधी की प्राण धारा है। अवधी ने न्याय व समता की संस्कृति सारी दुनिया को दी है। गौरीगंज, सुल्तानपुर की अवधी अकादमी के अध्यक्ष जगदीश पीयूष ने कहा कि 1976 में अमेठी स्थित मलिक मोहम्मद जायसी की मजार से शुरू हुआ अवधी जागरण आंदोलन देश-विदेश भ्रमण करते हुए 36 साल बाद ठाणे के स्वानंद आश्रम तक आ पहुचा है। इस प्रकार के आंदोलनों ने काफी शक्ति मुहैया कराई है। उन्होंने यह भी कहा कि मेरे विचार से प्रेम शुक्ल को विश्व अवधी सम्मेलन का नेतृत्व भी करना चाहिए। अवध ज्योति के संपादक डॉ. राम बहादुर मिश्र ने अवधी गद्य के सूने कोने को चुनौती मानते हुए अपनी थाती को संभालने की बात कही। अवधी विकास संस्थान के अध्यक्ष एड. विनोद ने कहा कि आज कई अवधी सीरियल आ रहे हैं। भाषा संस्कृति नहीं बचेगी तो देश कैसे बचेगा। इसलिए सभी को मिलजुल कर प्रयास करना है। प्रवासी संसार के संपादक राकेश पांडेय ने सवाल उठाया कि अवधी माटी के कलाकार अवधी का खाते हैं पर गाते हैं भोजपुरी की। क्यों वे अपनी बोली व गायन को अवधी कहने में शर्म महसूस करते हैं? सुप्रसिद्ध अवधी विद्वान डॉ. आद्या प्रसाद सिंह .प्रदीप. ने कहा कि हजारों साल से अवधी देश की साहित्यिक-सांस्कृतिक चेतना की प्रतीक रही है। अवध क्षेत्र के ही महावीर प्रसाद द्विवेदी व निराला सरीखे साहित्यकारों ने ही हिंदी के वर्तमान स्वरूप का निर्माण किया था। उर्दू रोजनामा हिंदुस्थान के संपादक सरफराज आरजू ने अवधी को गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक बताया तो नई दुनिया के रीजनल एडीटर पंकज शुक्ल ने कहा कि आज का जमाना इंटरनेट का है, इसलिए अवधी के समग्र साहित्य को इंटरनेट पर लाना होगा, तभी यह समाज में अपनी जड़ें तेजी से जमा पाएगी। परिचर्चा में नवनीत के पूर्व संपादक डॉ. गिरिजा शंकर त्रिवेदी, साहित्यकार, डॉ. आशारानी लाल, अभियान के अध्यक्ष अमरजीत मिश्र व दोपहर के संपादक निजामुद्दीन राइन व सिटी चैनल (जानपुर) के प्रमुख संवाददाता सौरभ ओमर ने भी शिरकत की। सम्मेलन में यूपी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन अवधी सम्मेलन, मुंबई के संयोजक राजेश विक्रांत ने किया।

सृजन संवाद में चाड गणतंत्र के हिंदी व भारतप्रेमी अदुम इदरीस अदुम व अदम महमत येस्केइमी ने हिंदी वक्तव्य कविता प्रस्तुत कर अपने हिंदी व भारत प्रेमी होने का सबूत दिया। लोक काव्य संध्या में देवमणि पांडेय के कुशल संचालन में द्वारिका प्रसाद त्रिपाठी बृजनाथ, डॉ. अशोक गुलशन (बहराइच), डॉ. रजनीकांत मिश्र, मुरलीधर पांडेय, राम प्यारे सिंह रघुवंशी, कमलेश पांडेय तरूण, उबैद आजम आजमी, देवराज मिश्रा, आशीष पांडेय, लक्ष्मी यादव, रास बिहारी पांडेय, जवाहर लाल निर्झर, रुस्तम घायल, शीतल नागपुरी व रवि यादव ने अपनी विविध रचनाएं प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में विकलांग की पुकार के अभय मिश्र के अतिथि संपादन में प्रकाशित अवधी गौरव विशेषांक तथा अनिल गलगली संपादित अग्निशिला मासिक पत्रिका के नए अंक का विमोचन प.पू. स्वानंद बाबा सेवा न्यास के प्रमुख पं. दुर्गा प्रसाद पाठक द्वारा किया गया। इसमें राष्ट्रीय सहारा (लखनऊ) के प्रमुख संवाददाता के बख्श सिंह, सुवर्णस्पर्श जेम्स एंड ज्वेलरी के पार्टनर विमल पटेल, मुंबई कांग्रेस के महासचिव जाकिर अहमद, अर्थकाम डॉट काम के संपादक अनिल सिंह, मेट्रोकार्ड्स एंड हालिडेज के ऑलिवर स्टेन्स, मुंबई मित्र / वृत्त मित्र समाचार पत्र के संपादक अभिजीत राणे, उद्योगपति बबलू पांडेय, लेखिका डॉ. कृष्णा खत्री, पत्रकार रवि कुमार राठौर (दैनिक सवेरा), लाइव इंडिया के रवि तिवारी, गायक रवि त्रिपाठी,प्रभाकर कश्यप, पत्रकार शेषनारायण त्रिपाठी, श्रीश उपाध्याय, उदयभान पांडेय, संगीतकार शिवम् पांडेय, एनडी टीवी के वरिष्ठ पत्रकार सुनील सिंह, सिद्धि विनायक मंदिर के पूर्व ट्रस्टी उदय प्रताप सिंह, नवभारत टाइम्स की पत्रकार कंचन श्रीवास्तव व रीना पारीक, वीमेंस वेल्फेयर फाउंडेशन की अध्यक्ष सुश्री अर्चना मिश्र (पुणे), विकलांग की पुकार के संपादक सरताज मेहदी, डॉ. रमाकांत क्षितिज, डॉ. वेद प्रकाश दुबे, पत्रकारिता कोश के संपादक आफताब आलम, लेखिका-उद्घोषिका सलमा सैयद, साहित्यप्रेमी महेश शर्मा, अमरदेव मिश्रा, जगदंबाप्रसाद पाठक समेत साहित्य, पत्रकारिता, समाजसेवा व कला क्षेत्र के अनेक महानुभाव उपस्थित रहे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें