
राजेश विक्रांत, मुबई
हिंदुस्तान व भारतीय संस्कृति की रक्षा करने वाले वीर मराठों की भूमि मुंबई में भगवान राम के क्षेत्र अवध की भाषा अवधी का सम्मेलन होना एक सुखद संकेत है जिसे "रंग भारती" व "हम लोग" ने साकार किया है। अवधी यूपी के 24, बिहार के 2 तथा नेपाल के 8 जिलों में लगभग 12 करोड़ लोगों की भाषा है। तुलसीदास, अमीर खुसरो, मलिक मोहम्मद जायसी, मुल्ला दाउद, कबीर, कुतुबन, मंझन, रहीम सरीखे महाकवि अवधी में हैं। यह उदगार अवधी अकादमी के अध्यक्ष व बोली बानी के संपादक जगदीश पीयूष ने विलेपार्ले (पश्चिम) स्थित शुभम हाल में आयोजित "अवधी सम्मेलन" के मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। हिंदी की आत्मा अवधी पर परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामजी तिवारी ने कहा कि उल्लास, जीवन व विकास की भाषा अवधी बड़ी भाग्यशाली है। इसके भाग्य का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि इसे गोस्वामी तुलसीदास सरीखा महाकवि मिला व गोस्वामी का भाग्य कि उन्हें श्री राम सरीखा नायक मिल गया, सुपरिणाम श्रीरामचरितमानस की रचना हुई।
मंचस्थ डॉ. रामजी तिवारी, जगदीश पीयूष, नवभारत टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार अनुराग त्रिपाठी, हम लोग के अध्यक्ष एडवोकेट विजय सिंह, दोपहर का सामना के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल व कवि देवमणि पांडेय द्वारा दीप प्रज्जवलन व मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण तथा सुप्रसिद्ध लोक गायक दिवाकर द्विवेदी के मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरूआत हुई। परिचर्चा की शुरूआत करते हुए अनुराग त्रिपाठी ने कहा कि मुंबई में हिंदी को जन्म देनेवाली अवधी का दीप पहली बार प्रज्जवलित हुआ है, हमें इसे हमेशा जलाए रखना है। विशेष वक्ता प्रेम शुक्ल ने अवधी प्रेमियों को भरोसा दिलाया कि अवधी का प्रवाह रुकने नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि "रंगभारती" की ओर से शीघ्र ही "अवध महोत्सव" का आयोजन किया जाएगा तथा हिंदी की जितनी बोलियां-भाषाएं हैं, उनके प्रचार-प्रसार व विकास के लिए भी एक अभियान की शुरुआत की जाएगी। अवधी श्रीराम की भाषा यानी अखिल ब्रह्मांड की भाषा है। यह हिंदी की आत्मा है ही, साथ ही हिंदी का शरीर अवधी का है, श्रीरामचरितमानस व पदमावत के बिना हिंदी की कल्पना ही नहीं की जा सकती।
सम्मेलन में अवध की मिट्टी से जुड़े "श्री महाराष्ट्र रामलीला मंडल" के महामंत्री द्वारिकानाथ मिश्रा, लोकगायक दिवाकर द्विवेदी व बाल कलाकार आदित्यांश का सम्मान किया गया। इस अवसर पर देवमणि पांडेय के संचालन में आयोजित लोककाव्य संध्या में वृजनाथ, आनंद त्रिपाठी, गीतकार हरिश्चंद्र, पं. किरण मिश्र, बोधिसत्व, ह्रदयेश मयंक, राम प्यारे रघुवंशी, सुरेश मिश्र, ओम प्रकाश तिवारी, अभय मिश्र, रास बिहारी पांडेय, मनोज मुंतशिर, आदि ने लोकभाषा की बहुरंगी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। अतिथियों का स्वागत "हम लोग" के अध्यक्ष एडवोकेट विजय सिंह ने किया। आभार प्रदर्शन अवधी सम्मेलन मुंबई के संयोजक राजेश विक्रांत ने माना।
राजेश विक्रांत
सहायक संपादक-पत्रकारिता कोश
ई-मेलः rajeshvikrant@gmail.com
ब्लॉग - www.rajeshvikrant.blogspot.com
वेबसाइटः www.hindustanimedia.com
हिंदुस्तान व भारतीय संस्कृति की रक्षा करने वाले वीर मराठों की भूमि मुंबई में भगवान राम के क्षेत्र अवध की भाषा अवधी का सम्मेलन होना एक सुखद संकेत है जिसे "रंग भारती" व "हम लोग" ने साकार किया है। अवधी यूपी के 24, बिहार के 2 तथा नेपाल के 8 जिलों में लगभग 12 करोड़ लोगों की भाषा है। तुलसीदास, अमीर खुसरो, मलिक मोहम्मद जायसी, मुल्ला दाउद, कबीर, कुतुबन, मंझन, रहीम सरीखे महाकवि अवधी में हैं। यह उदगार अवधी अकादमी के अध्यक्ष व बोली बानी के संपादक जगदीश पीयूष ने विलेपार्ले (पश्चिम) स्थित शुभम हाल में आयोजित "अवधी सम्मेलन" के मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। हिंदी की आत्मा अवधी पर परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामजी तिवारी ने कहा कि उल्लास, जीवन व विकास की भाषा अवधी बड़ी भाग्यशाली है। इसके भाग्य का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि इसे गोस्वामी तुलसीदास सरीखा महाकवि मिला व गोस्वामी का भाग्य कि उन्हें श्री राम सरीखा नायक मिल गया, सुपरिणाम श्रीरामचरितमानस की रचना हुई।
मंचस्थ डॉ. रामजी तिवारी, जगदीश पीयूष, नवभारत टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार अनुराग त्रिपाठी, हम लोग के अध्यक्ष एडवोकेट विजय सिंह, दोपहर का सामना के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल व कवि देवमणि पांडेय द्वारा दीप प्रज्जवलन व मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण तथा सुप्रसिद्ध लोक गायक दिवाकर द्विवेदी के मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरूआत हुई। परिचर्चा की शुरूआत करते हुए अनुराग त्रिपाठी ने कहा कि मुंबई में हिंदी को जन्म देनेवाली अवधी का दीप पहली बार प्रज्जवलित हुआ है, हमें इसे हमेशा जलाए रखना है। विशेष वक्ता प्रेम शुक्ल ने अवधी प्रेमियों को भरोसा दिलाया कि अवधी का प्रवाह रुकने नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि "रंगभारती" की ओर से शीघ्र ही "अवध महोत्सव" का आयोजन किया जाएगा तथा हिंदी की जितनी बोलियां-भाषाएं हैं, उनके प्रचार-प्रसार व विकास के लिए भी एक अभियान की शुरुआत की जाएगी। अवधी श्रीराम की भाषा यानी अखिल ब्रह्मांड की भाषा है। यह हिंदी की आत्मा है ही, साथ ही हिंदी का शरीर अवधी का है, श्रीरामचरितमानस व पदमावत के बिना हिंदी की कल्पना ही नहीं की जा सकती।
सम्मेलन में अवध की मिट्टी से जुड़े "श्री महाराष्ट्र रामलीला मंडल" के महामंत्री द्वारिकानाथ मिश्रा, लोकगायक दिवाकर द्विवेदी व बाल कलाकार आदित्यांश का सम्मान किया गया। इस अवसर पर देवमणि पांडेय के संचालन में आयोजित लोककाव्य संध्या में वृजनाथ, आनंद त्रिपाठी, गीतकार हरिश्चंद्र, पं. किरण मिश्र, बोधिसत्व, ह्रदयेश मयंक, राम प्यारे रघुवंशी, सुरेश मिश्र, ओम प्रकाश तिवारी, अभय मिश्र, रास बिहारी पांडेय, मनोज मुंतशिर, आदि ने लोकभाषा की बहुरंगी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। अतिथियों का स्वागत "हम लोग" के अध्यक्ष एडवोकेट विजय सिंह ने किया। आभार प्रदर्शन अवधी सम्मेलन मुंबई के संयोजक राजेश विक्रांत ने माना।
राजेश विक्रांत
सहायक संपादक-पत्रकारिता कोश
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