शनिवार, 31 दिसंबर 2016

राजेश विक्रांत की पुस्तक एक श्रेष्‍ठ व्यंग्य कृति

सरल, सहज व बिना लॉग लपेट के व्यक्त व्यंग्य विचार

बतरस (व्यंग्य संकलन)

लेखक    - राजेश विक्रांत

समीक्षक - डा. राजेश्वर उनियाल


    हालांकि व्यंग्य लेख तो हमें यदाकदा पढने को मिल ही जाते हैं, परंतु व्यंग्य संकलन या व्यंग्य विधा की पुस्तकें बहुत कम उपलब्ध हो पाती हैं । इसी क्रम में जब मुझे श्री राजेश विक्रांत जी का व्यंग्य संकलन बतरस पढने को मिला तो मैंने समय निकालकर उसे पढा और पढता चला गया । सरल, सहज व बिना लाग-लपेट के व्यक्त व्यंग्य विचारों को अगर पढ़ना हो तो मैं कहूंगा कि श्री राजेश विक्रांत जी की पुस्तक एक श्रेष्‍ठ व्यंग्य कृति है । इस हेतु उन्हें साधुवाद ।

    व्यंग्य एक ऐसी विधा है जिसमें लेखक प्रतीकात्मक ढंग से महत्वपूर्ण बातें कह जाता है । व्यंग्य गंभीर होने के साथ-साथ चोटिल होता है और चोटिल होने के लिए व्यंग्य को धारदार होना चाहिए । लेकिन स्वभाव से सीधे व सरल श्री विक्रांत प्रतीकात्मक के बजाए वर्णनात्मक पर अधिक ध्यान देते हैं तथा उनको जो कहना होता है वह सीधे-सीधे कह देते हैं ।

    दूसरी बात यह है कि प्रत्येक व्यंग्यकार की अपनी एक विशिष्ट शैली होती है । वह अपनी शैली विकसित करता है और उसी शैली में व्यंग्य रचता है । इससे एक तो साहित्य भी समृद्ध होता है और साथ ही रचनाकार की भी एक छाप बनती है । आशा है कि श्री राजेश विक्रांत जी भी अपनी भावी रचनाओं में अपनी व्यंगात्मक शैली को विकसित करेंगे ।

    व्यंग्य की एक और विशेषता होती है कि इसके लेखन में कहीं भी लगना नहीं चाहिए कि आप व्यंग्य लिख रहे हैं । आपकी विषय वस्तु व कथन अपने आप में व्यंग्य को उपजाऊ बना देगी । कई बार तो पूरी रचना को पढ़ने के बाद ही अहसास होता है कि आपने व्यंगात्मक बात की है । व्यंग्य का सीधा सा तात्पर्य है कि यह पाठक को कुछ नहीं, बहुत कुछ सोचने पर विवश कर दे ।

इसी के साथ श्री राजेश विक्रांत जी व्यवसाय से पत्रकार हैं और उन्होंने अधिकतर रचनाएं अपने समाचार पत्र हेतु लिखे हैं । समाचार पत्र हेतु लेखन और पुस्तक लेखन में बहुत बड़ा अंतर होता है । समाचार पत्र हेतु लिखते समय आपको संपादक की रुचि व मर्यादाओं का ध्यान रखना पडता है अर्थात आपकी एक सीमा रेखा होती है । जबकि पुस्तक लेखन में आपका स्वामी वह पाठक होता है जो आपकी पुस्तक खरीद कर पढ़ता है । इसलिए पुस्तक लेखन के समय पाठकवर्ग को ध्यान रखते हुए लिखना चाहिए । हम यह भी कह सकते हैं कि एक पत्रकार जब अपनी व्यंग्य रचनाएं पत्रिका की अपेक्षा पुस्तक हेतु रचता है तो उसे लिखने की ज्यादा स्वतंत्रता होती है ।
    भारत पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित की इस पुस्तक में 50 व्यंग्य रचनाएं हैं । यदि थोडा सा ध्यान पुस्तक के प्रकाशन की गुणवत्ता की ओर दिया जाता तो निसंदेह यह सोने में सुहागा कहलाता ।
    श्री राजेश विक्रांत जी के अब तक लगभग 12,000 लेख प्रकाशित हो चुके हैं । आप युवा हैं व मां सरस्वती का वरदहस्त आपके ऊपर है । हमें आशा है कि भविष्य में आपकी और भी उत्कृष्ट कृतियां पाठकों के हाथों में होगी ।

देवमणि दुबे को स्वानन्द सारस्वत सम्मान

देवमणि दुबे को स्वानन्द सारस्वत सम्मान
स्वानन्द आश्रम में अमृत रश्मियों के बीच काव्य निशा सम्पन्न


थाणे: भारतवर्ष की शान कहे जाने वाले उपनिषदों की रचना भी अरण्य में हुई और आज शरद पूर्णिमा पर काव्य गंगा से येऊर वन का स्वानन्द परिसर भी अमृतमय हो गया है। आज के सम्मानमूर्ति और अन्य कवियों की रचनाओं से पता चलता है कि यह धरती बहुत पूण्य वाली है। यह उदगार प्रोफेसर नन्दलाल पाठक, कार्यकारी अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के थे जो उन्होंने प.पू.स्वानंद बाबा आश्रम, येऊर हिल्स, ठाणे-पश्चिम में काव्य निशा तथा सम्मान समारोह में समारोह अध्यक्ष के रूप में व्यक्त किए। मंच पर विराजमान मुख्य अतिथि रविंद्र भुसारी, संगठन महामंत्री, महाराष्ट्र भाजपा, विलेपार्ले के विधायक पराग अलवनी, मुम्बई मित्र, वृत्त मित्र के समूह सम्पादक अभिजीत राणे का स्वागत न्यास के मुख्य न्यासी प्रेम शुक्ल व पंडित दुर्गा प्रसाद पाठक तथा कार्यक्रम संयोजक बबलू पांडेय ने किया। इस अवसर पर जाने माने कवि  देवमणि दुबे को तृतीय स्वानन्द सारस्वत सम्मान 2016 स्वरूप शॉल, श्रीफल, ट्राफी, पुष्पगुच्छ और 11001 रुपए की नकद राशि से सम्मानित किया गया। प्रेम शुक्ल ने देवमणि दुबे के बारे में बताया कि
बहुत लोग मानते हैं कि भारत की पॉलिटिक्स यूपी के बिना जीरो बटा सन्नाटा है। और बीजेपी ने यूपी वाली पॉलिटिक्स में अपनी जड़ गहराने के लिए देवमणि दुबे को तैयार किया है। 27 अगस्त को देवमणि अपनी रेलवे की नौकरी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली है वे सुल्तानपुर के लम्भुआ से भाजपा के टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़ेंगे। देवमणि ने ही अपने कार्यकाल में एक बार रेलमंत्री के सास-ससुर को ट्रेन से उतारा था।
2006 में रेलमंत्री थे लालू प्रसाद यादव। उसी दौरान देवमणि विजिलेंस डायरेक्टर थे। लालू के रिश्तेदारों से भिड़ंत हुई छपरा रेलवे स्टेशन पर। लालू के सास-ससुर और कुछ रिश्तेदार फर्स्ट एसी डिब्बे में जा रहे थे। गाड़ी थी बिहार संपर्क क्रांति. देवमणि ने पता किया तो इन लोगों के पास टिकट नहीं था। तो छपरा स्टेशन पर उतारकर जुर्माना ठोंक दिया।
देवमणि की हिस्ट्री बड़ी रिच है। कवि, वक्ता और इंग्लिश लिट्रेचर से ग्रेजुएट, साइंस से पोस्ट ग्रेजुएट देवमणि ने सन 1988 में यूपी पुलिस जॉइन की थी। पुलिस अधीक्षक बने। वे1992 में रेलवे अफसर बने। सन 2003 में रेलवे के विजिलेंस डायरेक्टर बन गए। कवि साहित्यकार के बाद अब वे राजनेता की भूमिका में हैं।
'राजनीति गम्भीर विषय है, आवारों पर छोड़ न देना' सम्मानमूर्ति देवमणि दुबे  की इस लम्बी जीवंत कविता के जादू से समस्त श्रोतागण मोहित हो गए। उन्होंने अपनी ख़ास शैली में कुछ और रचनाएँ सुनाकर सभी का दिल जीत लिया।
शांति प्रेम शुक्ल ने सुश्री प्रीति गांधी का सम्मान किया। मुख्य अतिथि रविंद्र भुसारी ने कहा कि इस सुरम्य माहौल में मैं पहली बार आया हूँ। पर चमत्कृत हो गया हूँ। प्रेम शुक्ल को इस जंगल में धर्म और साहित्य का मंगल करने के लिये साधुवाद।
काव्यनिशा में लोकनाथ तिवारी अनगढ़, कमलेश पांडेय तरुण, रासबिहारी पांडेय, सुश्री ज्योति त्रिपाठी, शिवजी पांडेय शिवम तथा उमेश पांडेय ने राजेश विक्रांत के संचालन में हिस्सा लिया।
इस अवसर पर सुश्री प्रीति गांधी,  एन सी पी नेता उदय प्रताप सिंह, डॉ हरीश सिंह, शेष नारायण त्रिपाठी, शिक्षा विद नूतन पांडेय, सी ए पंकज जायसवाल, आलोक पांडेय, जाकिर अहमद, आलोक पांडेय, प्रेमचंद शर्मा, पुष्पराज मिश्र, नागेंद्र शुक्ला, गिरीश यादव, धर्मेंद्र पांडेय, सुनील मिश्र, गणेश पांडेय, सुप्रसिध्द  फिल्म निर्माता सुरजीत सिंह, दिवाकर सिंह, सिम्पम सिंह, प्रियंका दुबे, मयंक रावत, मनोहर पंडित, गुड्डू पाठक, संजय सिंह ठाकुर, अरुण शुक्ल, जीतेन्द्र मल्लाह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016

व्यक्ति एक, व्यक्तित्व अनेक: राजेश विक्रांत' का विमोचन

विकलांग की पुकार के वार्षिकोत्सव में हुआ 'व्यक्ति एक, व्यक्तित्व अनेक: राजेश विक्रांत' का विमोचन

सुरेश डी मिश्र, डॉ पवन त्रिपाठी,  प्रीतम कुमार सिंह त्यागी व राजेश एम मिश्र हुए सम्मानित

प्रेम शुक्ल फाउंडेशन उद्घाटन सम्पन्न



मुम्बई: आज का यह कार्यक्रम कर्मयोगी पत्रकार राजेश विक्रांत को समर्पित है। निरन्तर सत्कर्म और सृजन ही उनकी विशेषता है। यह
प्रोफेसर नन्दलाल पाठक, कार्यकारी अध्यक्ष महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ने मंगलवार की शाम
 राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक 'विकलांग की पुकार ' के 12 वें वार्षिकोत्सव में ब्रह्म महेश्वर भवन, सन्यास आश्रम, विलेपार्ले पश्चिम में व्यक्त किये।

वरिष्ठ पत्रकार, भाजपा नेता तथा विकलांग के पुकार के संरक्षक प्रेम शुक्ल ने कहा कि राजेश विक्रांत हर विषय के जानकार हैं। समन्वय कला में माहिर हैं तथा इनकी व्यंग्य रचनाएँ भी हरिशंकर परसाई और के पी सक्सेना से किसी तरह कम नही हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों
अंतरराष्ट्रीय शायर डॉ त्रिपाठी, डॉ राधेश्याम तिवारी (एसोसिएट प्रोफेसर, इतिहास, आर आर पी जी कॉलेज, अमेठी) तथा श्री अवधेश नारायण पांडेय, ग्रुप प्रेजिडेंट, टापवर्थ ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुई। कवि रवि यादव की सरस्वती वंदना के बाद अमन कबीरी ने प्रार्थना प्रस्तुत की।
इस अवसर पर दोपहर का सामना के मुख्य उपसम्पादक अभय मिश्र द्वारा संपादित पुस्तक व्यक्ति एक, व्यक्तित्व अनेक: राजेश विक्रांत का विमोचन हुआ। तथा टॉप म्यूजिक कंपनी की प्रस्तुति सुरजीत सिंह द्वारा निर्मित किए जाने वाले राहुल पंडित निर्देशित वृत्त चित्र "सौम्य, सरल और शांत राजेश विक्रांत" का शुभारंभ भी किया गया। अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम के प्रमुख आयोजक सरताज मेहदी, सलाहकार सम्पादक डॉ जे पी बघेल, पत्रकारिता कोश के सम्पादक आफताब आलम व नमस्ते बॉलीवुड के सम्पादक धर्मेंद्र पांडेय ने किया। अखबार के संरक्षक प्रेम शुक्ल के जन्म माह में आयोजित इस कार्यक्रम में एक सेवाभावी संस्था प्रेम शुक्ल फाउंडेशन- पी एस एफ का उद्घाटन भी अतिथियों द्वारा किया गया और  दैनिक विश्वमित्र व ब्लिट्ज के वरिष्ठ पत्रकार तथा कवि प्रीतम कुमार सिंह त्यागी को पत्रकारिता के लिये और पत्रकार लेखक राजेश एम मिश्र को पी एस एफ सहयोगी सम्मान प्रदान किया गया।
डॉ राधेश्याम तिवारी ने कहा कि राजेश विक्रांत से मुझे परिचित हुए बहुत ज्यादा समय नही हुआ। पर इनकी सरलता और शांत स्वभाव तथा बतरस की लेखन कला ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। अवधेश नारायण पांडेय ने कहा कि राजेश विक्रांत ने अपने परिश्रम के बल पर अमेठी से आकर मुंबई में एक बड़ा मुकाम बनाया है। सागर त्रिपाठी तथा गीतकार रास बिहारी पांडेय ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम में एस्ट्रोलॉजी टुडे के सम्पादक डॉ पवन त्रिपाठी को पत्रकारिता गौरव  तथा श्री महाराष्ट्र रामलीला मण्डल के महासचिव सुरेश डी मिश्र को विकलांग की पुकार संस्कृति गौरव से सम्मानित किया गया। मंच संचालक अश्विनी कुमार जोशी, साहित्यप्रेमी बी एल रंगा, मिलन फाउंडेशन के अध्यक्ष खान, शिक्षाविद नूतन पांडेय ने इस मौके पर राजेश विक्रांत का सम्मान किया।कार्यक्रम की आयोजन समिति में संपादक एड सैयद आफताब मेहदी, समाजसेवी सैयद शुजात हुसैन, तेजस्वी दुनिया के सह संपादक प्रोफेसर सन्तोष तिवारी, पत्रकार प्रेम चौबे, कवि अनिल त्रिपाठी कड़क व नूर हसन का समावेश रहा। इस अवसर पर आशीर्वाद के निदेशक डॉ उमाकांत बाजपेयी, हम लोग के अध्यक्ष एड विजय सिंह,श्रुति संवाद के अध्यक्ष अरविन्द राही, लेखक विद्याभूषण तिवारी, डा वनमाली चतुर्वेदी, वासन्ती वैद्य, आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली, पत्रकार सैयद सलमान, रविंद्र मिश्र, जाफर शेख, फैजुल शेख, गिरिधर बलोदी, सन्तोष शुक्ल, कैलाश गुप्ता, संजय पांडे,समाजसेवी कमाल अहमद, राकेश कुमार तिवारी, डॉ वीरेंद्र मिश्र, अमेठी चैरिटेबल ट्रस्ट के राज मिश्र और के डी शुक्ल, खबरें पूर्वांचल के सम्पादक रविंद्र दुबे, चार भुजा टाइम्स के रिपोर्टर जितेंद शर्मा, पत्रकार संजय अमान, कवयित्री लक्ष्मी यादव, समाजसेवी देवेश तिवारी, सी ए प्रवीण जैन, आदिज्ञान सम्पादक जीत सिंह चौहान, कथाकार राजीव रोहित, प्रीति पांडेय, अनुपम मिश्र, बबलू मिश्र, विभा दुबे, त्रिभुवन दुबे, डिजाइनर जितेंद पांडेय, गीतकार रुस्तम घायल, कवि जवाहर लाल निर्झर, विनय शर्मा दीप, प्रेम जौनपुरी, शिक्षक रवि उपाध्याय आदि प्रमुख हस्तियां कार्यक्रम में मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन व्यंग्यकार, कवि डॉ अनन्त श्रीमाली  ने किया।

शनिवार, 2 जुलाई 2016

रसदार है बतरस!- अवनींद्र आशुतोष

रसदार है बतरस!
- अवनींद्र आशुतोष
शब्दों की यात्रा आरंभ करना सहज नहीं है। साहित्य, संस्कृति और संस्कार सबके पृथक होते हैं। किंतु वर्तमान समय में जहां कलम का अधिकतम स्थान 'की बोर्ड' ने अधिग्रहित कर लिया है, राजेश विक्रांत की जिजीविषा ही कही जाएगी कि इनकी लेखनी मौलिकता के द्रुतगति मार्ग पर कलम से लैस होकर जिस गति से गंतव्य तक सरपट  भागी जा रही है वह अद्भुत है। राजेश विक्रांत केवल एक लेखक नहीं हैं, अपितु एक कुशल और चतुर अवलोकनकर्ता भी हैं इसलिए इनकी लेखनी रसदार होती है। इसे मैं आज से नहीं बल्कि 1993 से महसूस कर रहा हूँ, दोपहर का सामना के शुरूआती दिनों से। वे बोझिल से बोझिल विषय को रोचक बना देने की कला जानते हैं। विज्ञान व तकनीकी विषय हो या आर्थिक वे रस घोल ही देते हैं।
बतरस राजेश विक्रांत की प्रथम मौलिक पुस्तक है। इससे पहले सम्पादन, संकलन और अनुवाद तो बहुत किये, पर यह पहली निजी पुस्तक है। मुझे यह भी कहना है कि उनके व्यंग्य का मैं लगभग 22 साल पुराना पाठक हूँ। शायद 1994 के आसपास सामना में ही उन्होंने एक व्यंग्य लिखा था जिसका शीर्षक साहित्य का अश्वेत पत्र रहा होगा। उसका जो तेवर था वह बतरस में भी मौजूद है। इसमें भी राजेश ने व्यंग्य और संवेदना को एक नया आयाम दिया है। प्रायः हमने देखा है कि अनेक विद्वान अनेक बार अपने लेखन के मूल मार्ग से विचलित होकर विषयांतर तक हो जाते हैं, परंतु राजेश अपनी लेखनी की जमीन इस प्रकार मजबूत कर लेते हैं कि पाठक बिना कुछ अन्य विचार किए इनके लेखन का कायल हो जाता है।
मैं एक लेखक की सफलता का आकलन इस आधार पर भी करता हूं कि बोझिल विषय पर लिखते समय पाठकों को पकड़े रहने में उसे कितनी महारथ प्राप्त है, इस बारे में राजेश की रसदार बतरस एक उदाहरण है। बतरस का महत्व मेरी दृष्टि में इसलिए भी है क्योंकि मुम्बई के भारत पब्लिकेशन ने राजेश की प्रतिभा को समझा और उसे हमारे और आपके समक्ष प्रस्तुत किया। इस नेक कार्य के लिये भारत पब्लिकेशन और प्रकाशक सुश्री कमर जबीं को साधुवाद।
बतरस से दोपहर का सामना के पाठक भलीभांति परिचित हैं। आठ नौ सालों से यह कालम निरन्तर चल रहा है। उसी में से चुने गए 50 लेख बतरस में समाहित किये गए हैं। पहले लेख (एक सच्ची) भूमिका के अनुसार राजेश की पत्नी शर्मिला की दृष्टि में व्यंग्य की औकात कूड़ा है, किंतु यह राजेश विक्रांत की लेखनी का ही जादू है कि पत्नी की सोच बदलकर जो कीर्तिमान उन्होंने स्थापित किया है वह पुस्तक के पन्ने दर पन्ने पाठकों को गुदगुदाने के साथ सोचने पर मजबूर कर देता है। मेरा गांव मेरा देश, प्यार की बातें, विकास का वड्रा मॉडल, अथ श्री कचहरी कथा, सम्मान की भूख, शिक्षा बनाम त्याग, जियो टानी ब्लेयर, तलवार की धार, अपने बारे में, एक सुखी दिन, लोकार्पण एक लघु प्रबन्ध, चलो गांव की ओर आदि लेख बहुत बढ़िया बन गए हैं जबकि शीर्षक लेख 'बतरस' तो संग्रह में मील का पत्थर जैसा है। पूरी की पूरी पुस्तक 'बतरस' वाकई पठनीय है क्योंकि इसमें व्यंग्य का प्राण है।
समीक्षक मुम्बई के जाने माने पत्रकार हैं।

राजेश विक्रांत को तिलक पत्रकारिता पुरस्कार

राजेश विक्रांत को तिलक पत्रकारिता पुरस्कार

मुम्बई: दैनिक दक्षिण मुम्बई में व्यंग्यधारा के स्तम्भकार, विकलांग की पुकार के प्रबन्ध सम्पादक, पत्रकारिता कोश व मीडिया डायरेक्ट्री के सहायक सम्पादक तथा दोपहर का सामना के स्तम्भकार व 'अवधी सम्मलेन' मुम्बई के 'संयोजक  श्री राजेश विक्रांत को गुजराती साप्ताहिक - 'हीरा माणेक' व 'ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन' (आइजा ) की ओर से लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती के अवसर पर  आगामी 23 जुलाई, 2016 को मुम्बई में एक भव्य कार्यक्रम में 'लोकमान्य तिलक पत्रकारिता पुरस्कार' प्रदान किया जाएगा। हीरा माणेक के सम्पादक हार्दिक हंडिया ने बताया कि श्री राजेश विक्रांत जी पत्रकारिता में 25 साल पूरा कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 12000 से अधिक लेख लिखे हैं। लिहाजा उन्हें सम्मानित करते हुए हमे अत्यंत प्रसन्नता एवं गौरव की अनुभूति हो रही है।

व्यंपत्रकार सैयद सलमान का स्वर्णजयंती समारोह/ राजेश विक्रांत की पुस्तक बतरस का विमोचन



सलमान पर पुस्तक प्रकाशित होगी
           - डॉ विनोद टिबड़ेवाल
पत्रकारिता के अजातशत्रु हैं सलमान
           प्रेम शुक्ल
गंगा जमुनी तहजीब के प्रतीक
      मौलाना जहीर अब्बास
विकलांग की पुकार द्वारा वरिष्ठ पत्रकार सैयद सलमान का स्वर्णजयंती समारोह सम्पन्न
व्यंग्यकार राजेश विक्रांत की पुस्तक बतरस का विमोचन भी हुआ

मुम्बई: सैयद सलमान ने सामाजिक पत्रकारिता को नई उंचाइयां प्रदान की हैं। उन्हें मैं पहले पत्रकारिता के छात्र फिर टी वी पत्रकार और अब अध्यापक के रूप में देख रहा हूँ। हर भूमिका में वे अतुलनीय हैं। यह उदगार मुम्बई विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ रामजी तिवारी सोमवार की शाम हिंदी साप्ताहिक विकलांग की पुकार द्वारा आयोजित वरिष्ट पत्रकार सैयद सलमान के 50 वे जन्मदिन समारोह के अध्यक्ष के रूप में सांताक्रुज पूर्व के मौलाना आजाद हाल में  व्यक्त किये। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार व भाजपा नेता प्रेम शुक्ल ने कहा कि सलमान को मैं उनके राजनितिक करियर की शरुआत से ही जानता हूँ। वे बाद में पत्रकारिता में आकर अजातशत्रु बने। शिक्षाविद् डॉ विनोद टिबड़ेवाल ने अपने कालेज के लाइफटाइम विद्यार्थी सलमान को शुभकामनाएं देते हुए घोषणा की कि विकलांग की पुकार के विशेषांक में शामिल सभी रचनाएं शीघ्र ही जे जे टी विश्वविद्यालय, झुंझुनू के हिंदी विभाग की ओर से पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित की जाएंगी। धार्मिक विद्वान् मौलाना सैयद जहीर अब्बास रिजवी ने सलमान को गंगा जमुनी तहजीब का प्रतीक बताया। कुपोषण के शिकार आदिवासी बच्चों की बेहतरी के लिए कार्यरत एक्टिविस्ट सुदर्शन नायर ने सलमान की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए मीडियाकर्मियों व समाजसेवियों से समाजहित में काम करने की अपील की। कार्यक्रम में
पूर्व डीसीपी रमेश वसईकर, लायन्स क्लब के सुदर्शन नायर, कवि गीतकार पण्डित किरण मिश्र, राजनेता शिवजी सिंह व पुलिस अधिकारी जितेंद्रपाल सिंह राणा भी प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
बता दें कि "विकलांग की पुकार" मुम्बई महानगर का सुपरिचित साहित्य संस्कृति प्रेमी समाचार पत्र है जोकि समाज, साहित्य, पत्रकारिता, कला व संस्कृति की प्रगति के लिये नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन तथा विशेषांकों का प्रकाशन करता रहता है। अखबार अब तक समर्पित समाजसेवा विशेषांक, विकलांग सेवा विशेषांक, आशीर्वाद विशेषांक, बन्धु विशेषांक, प्रतिबद्ध पत्रकारिता विशेषांक तथा एसीटी विशेषांक सरीखे विशेषांक सम्पादक एड सैयद आफताब मेहदी व संरक्षक प्रेम शुक्ल के नेतृत्व में कर चुका है। और इस अखबार के शुभचिंतक सैयद सलमान अपने जीवन के स्वर्ण जयंती वर्ष में हैं। इन दिनों विज़िटिंग फ़ैकल्टी, गरवारे इंस्टिट्यूट ऑफ कैरियर एजुकेशन एन्ड डेवलपमेंट, मुम्बई विद्यापीठ सैयद सलमान का जन्म मुम्बई में 12 अप्रैल 1966 को हुआ। वे लेमन न्यूज व चैनल वन न्यूज के मुख्य कार्यकारी सम्पादक रहे हैं, सहारा समय चैनल के ब्यूरो चीफ/ चैनल हेड, इन टाइम/ इन मुम्बई टी वी चैनल के विशेष संवाददाता, सिटी चैनल के समाचार सम्पादक तथा दोपहर, नवभारत, महानगर आदि अखबारों से जुड़े रहे हैं।
अपने सार्वजनिक सम्मान के बाद सैयद सलमान ने इस अवसर पर अपनी सफलता का श्रेय अभिभावकों, गुरुजनों एवम् अपने मित्रों को दिया। सैयद सलमान ने अपने भावपूर्ण सम्बोधन में अपने शिक्षकों को कई बार याद करते हुए उनसे मिले संस्कारों को अपनी पूँजी बताया। उन्होंने सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए गंगा-जमनी तहज़ीब की वकालत की और उसे आज की सबसे बड़ी ज़रुरत बताया। सैयद सलमान के अनुसार उनकी शख़्सियत में उनके मित्र, शुभचिंतक इस क़दर घुल मिल गए हैं कि वे अपने भीतर उनको और उनके भीतर ख़ुद को महसूस करते हैं। इस अवसर पर सैयद सलमान ने धार्मिक कट्टरपन्थियों को भी आड़े हाथों लिया और नफ़रत की भाषा बोलने वालों को इंसानियत का दुश्मन बताया। सैयद सलमान ने अपने स्कूल, कॉलेज और अपने पत्रकारिता से जुड़े अनेक साथियों को याद करते हुए कहा कि उनके जीवन में आर्थिक उपलब्धि तब गौण हो जाती है जब मेरे पास पुराने मित्रों के रूप में अमूल्य संपत्ति का ख़ज़ाना मौजूद है। विकलांग की पुकार परिवार के प्रति अपने भाव प्रकट करते हुए सैयद सलमान ने कहा कि जिस तरह का सम्मान उन्हें इस परिवार से मिला उसके लिए वे सदैव ऋणी रहेंगे।
कार्यक्रम में अखबार के सैयद सलमान विशेषांक (अतिथि सम्पादक, अभय मिश्र; मुख्य उपसम्पादक दोपहर का सामना),  व्यंग्यकार राजेश विक्रांत के प्रथम व्यंग्य संग्रह 'बतरस' तथा  पत्रिका 'अवध ज्योति' के 'अवधी कविता' अंक का लोकार्पण भी अतिथियों ने किया। कार्यकम की शुरुआत डॉ रजनीकांत मिश्र की सरस्वती वन्दना से हुई। फिर खन्ना मुजफ्फरपुरी, हस्तीमल हस्ती, सुश्री पल्लवी माने, इमरोज आलम व संजय शर्मा अमान ने अपने काव्यपाठ से माहौल को साहित्यिक रूप प्रदान किया। अतिथियों का स्वागत सरताज मेहदी, कार्यकारी सम्पादक, प्रबन्ध सम्पादक राजेश विक्रांत ने तथा सञ्चालन डॉ अनन्त श्रीमाली ने किया। इस अवसर पर शायर सोहेल खान, डिजाइनर भालचन्द्र मेहेर तथा होनहार चित्रकार सैयद नुमान का विशेष सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम में साहित्यकार कैलाश सेंगर, डॉ जे पी बघेल, हमलोग के अध्यक्ष एड विजय सिंह, अग्निशिला के सम्पादक अनिल गलगली, मुम्बई कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी जाकिर अहमद, एस्ट्रोलॉजी टुडे के सम्पादक डॉ पवन त्रिपाठी, प्रो देवेंद्र पाण्डेय, प्रो अरुणा स्वामी, प्रो यशोधरा काटकर, स्टेंनी पिंटो, शैलेन्द्र गांगण, परवेज़ खान, सुवर्णा कौंदर, टीम आओ मुस्कुराएँ, इंडियन एक्सप्रेस न्यूज चैनल के सी ई ओ सुरजीत सिंह, न्यूज एक्शन वर्ल्ड के चीफ दिनेश भारद्वाज, राजनेता सलीम मापखान, नूर अहमद खान, साहित्यप्रेमी अफरोज हैदर, पंकज तिवारी, खान, शुजात हुसैन, इकबाल अहमद, इम्तियाज अहमद, नवभारत के पत्रकार अखिलेश मिश्र, ततहिर बानो रिजवी कमाल अहमद, निहाल अहमद, के के त्रिपाठी, कैलाश गुप्ता, छायाकार मदन मसीह, देवेश तिवारी, विवेक मिश्र, राजमणि मिश्र, अनुपम मिश्र, सोनू चौबे, प्रीति पाण्डेय, कवि जयप्रकाश सोनकर, अभिनव मिश्र आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।
आयोजन समिति में पत्रकारिता कोश के सम्पादक आफताब आलम, पूर्व शिक्षा निरीक्षक, कवि पत्रकार राजदेव यादव, रमेश वोरा, उदीयमान संस्थान के महासचिव गीतकार, गायक, संगीतकार व आरजे शिवजी पाण्डेय 'शिवम्', प्रोफसर सन्तोष तिवारी, पत्रकार राजेश एम् मिश्र, नमस्ते बॉलीवुड के सम्पादक धर्मेन्द्र पाण्डेय, ठाकुर अजीत सिंह,  कवि रवि यादव, नूर हसन, पत्रकार प्रेम चौबे, निर्मल सन्देश के सम्पादक राधेश्याम विश्वकर्मा, गरवारे के क्षात्र लल्लन गुप्ता व बिंदास न्यूज के सम्पादक एबाद अंसारी शामिल रहे। आभार प्रदर्शन साहित्य सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष अमर त्रिपाठी ने किया।

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राजेश विक्रांत के सद्य प्रकाशित व्यंग्य संग्रह "बतरस" पर चर्चा गोष्ठी एवं व्यंग्य रचना पाठ सम्पन्न

बतरस सरीखे रसदार व्यंग्य पाठ की बौछार
"राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" तथा "स्वतन्त्र जन समाचार" की ओर से एक शाम व्यंग्य के नाम

मुम्बई: राजेश विक्रांत अच्छे व्यंग्यकार हैं। इसी वजह से हमने 2007 में इनका स्तम्भ बतरस शुरू किया था। यह ख़ुशी की बात है कि इसी नाम से इनकी पुस्तक भी आ गई है। मैंने पुस्तक पढ़ी है। इनमे दूसरा रवीन्द्रनाथ त्यागी बनने की सम्भावनाएँ मौजूद हैं। यह उदगार वरिष्ठ पत्रकार और भाजपा नेता प्रेम शुक्ल ने रविवार 26 जून  की शाम सांताक्रुज पूर्व के मौलाना आजाद हाल में आयोजित एक शाम व्यंग्य के नाम के प्रमुख अतिथि के रूप में व्यक्त किये। राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा तथा स्वतन्त्र जन समाचार ने राजेश विक्रांत के सद्य प्रकाशित व्यंग्य संग्रह बतरस पर चर्चा तथा व्यंग्य पाठ का आयोजन किया था। कार्यक्रम के अध्यक्ष कवि साहित्यकार माणिक मुंडे ने व्यंग्य को साहित्य की एक कठिन विधा बताया। इसलिये आजकल व्यंग्य पर बहुत कम लिखने वाले मिलते हैं। फिर भी विक्रांत की बतरस उम्मीदों पर खरी उतरने वाली पुस्तक साबित हुई है। जबकि सम्मानीय अतिथि लोकप्रिय कहानी पोर्टल व प्रकाशन संस्थान स्टोरीमिररडॉटकॉम के प्रमुख विभु दत्ता राउत ने हास्य व्यंग्य को जीवन का अंग कहते हुए राजेश विक्रांत के इस प्रथम व्यंग्य संग्रह पर काम करने की इच्छा दर्शाई। बतरस पर चर्चा की शुरआत करते हुए साहित्यकार व्यंग्यकार कैलाश सेंगर ने कहा कि शरद जोशी का कार्यक्षेत्र मुम्बई रहा है लिहाजा यहां व्यंग्य की बढ़िया फसल होती है। डॉ सूर्यबाला से लेकर राजेश विक्रांत तक। सभी का अपना एक अलग महत्व है। डॉ अनन्त श्रीमाली ने कहा कि हिंदी सामना में  राजेश जी का इसी नाम से एक कालम 2007 से ही छप रहा है। अखबारी कालम की मजबूरियों के बावजूद बतरस व्यंग्य, विसंगति व विद्रूपता का त्रिवेणी संगम है।  डॉ राजेश्वर उनियाल ने कहा कि पुस्तक में वर्णानात्मक शैली ज्यादा है जबकि इसे प्रतीकात्मक होना चाहिये। लेखक को अभी धार देने की जरूरत है तथा बतरस्कार को अपनी एक ख़ास शैली विकसित करनी होगी। पत्रकार अवनींद्र आशुतोष की राय में बतरस रसदार है। जबकि पत्रकारिता कोश के सम्पादक आफताब आलम ने सारगर्भित आलेख पढ़ते हुए पुस्तक को सार्थक बताया। मशहूर हास्य कवि महेश दुबे का व्यंग्यात्मक शैली में लिखा गया आलेख हास्य रस का ट्रिपल डोज बतरस राजेश विक्रांत ने प्रस्तुत किया।
व्यंग्य पाठ में डॉ अनन्त श्रीमाली ने श्री 'साडी खरीदाय नमः', कैलाश सेंगर ने 'शवयात्रा का यूनीफार्म', डॉ राजेश्वर उनियाल ने 'व्यंग्य संचालक',  सुश्री अलका अग्रवाल सिगतिया ने 'हिंदी माता का श्राद्ध', अमर त्रिपाठी ने 'कौवो की श्रद्धांजलि सभा', शीतला पाण्डेय ने 'तालियां' व राजेश विक्रांत ने 'अपने बारे में' का पाठ किया।
इस कार्यक्रम में स्वतन्त्र जन समाचार के सम्पादक डी के जोशी, आशीर्वाद के डायरेक्टर डॉ उमाकांत बाजपेयी, संगीतविद् पं वी नरहरि, तहलका महाराष्ट्र के सम्पादक आचार्य पवन त्रिपाठी, उद्घोषिका नीता बाजपेयी, कवयित्री ज्योति त्रिपाठी, कवि रवि यादव, अनिल त्रिपाठी कड़क, अखिलेश अनभिज्ञ, लोकनाथ तिवारी अनगढ़, कथाकार संगीता बाजपेयी, वरिष्ठ पत्रकार सैयद सलमान, ब्रजेश चन्द्रा, राहुल दुबे, पत्रकार गायक संजीव पाण्डेय, विकलांग की पुकार के कार्यकारी सम्पादक सरताज मेहदी, फोटोग्राफर अर्जुन काम्बले, इंडियन एक्सप्रेस न्यूज चैनल के एम डी सुरजीत सिंह, एड आरके मिश्र, साहित्यप्रेमी के के त्रिपाठी,रुचि शर्मा, शिखा आचार्य, अनुरत्न राय, कवयित्री रेखा रोशनी, नागेंद्र  कुमार, अरुण सिन्हा, शर्मिला मिश्र, अनुपम मिश्र, आशा त्रिपाठी, विद्याकान्त मिश्र, रमेश यादव, उपेन्द्र शुक्ल, मुकेश मिश्र, त्रिभुवन दुबे, उपेन्द्र शुक्ल, बबलू मिश्र, विभा दुबे, ओमप्रकाश मिश्र, मोहिन्दर सिंह नागी, दशरथ परब, नूर हसन आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम का सञ्चालन  प्रेम कुमार, आरजे ने किया जबकि आभार प्रदर्शन शत्रुघ्न प्रसाद अध्यक्ष, राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा, भारत ने किया।
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